:حضرت امام رضا علیه السلام
مَن جَلَسَ مَجلِسا يُحيى فيهِ أمرُنا ، لَم يَمُت قَلبُهُ يَومَ تَموتُ القُلوُبُ؛
[بحار الانوار ، ج 44 ، ص 278]
हज़रत इमाम रज़ा अ.स.
जो कोई भी ऐसी महफ़िल में बैठता है जिसमें हमारी (अहले बैत की) याद ज़िंदा की जाती है, उसका दिल उस दिन नहीं मरेगा जब सब दिल मुर्दा हो जाएंगे।
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